रेस्क्यू किए बच्चों को रखने के लिए चिह्नित होंगे आवास, बाल तस्करी, यौन शोषण पर आयोग ने जताई चिंता


उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग हर जिले में दो से चार ऐसी संस्थाओं और आवासों की पहचान करेगा, जहां रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित माहौल में रखा जा सकेगा। आयोग ऐसे संस्थाओं को फिट संस्था घोषित करेगा। नशे की गिरफ्त में आए बच्चों के उचित उपचार के लिए हर जिला अस्पताल में दो बेड आरक्षित किए जाएंगे।

बाल अधिकार आयोग ने बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को एक राज्य स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की। आयोग कार्यालय में हुई इस बैठक में बच्चों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा, गुमशुदगी, बाल तस्करी, यौन शोषण और अन्य सामाजिक उत्पीड़न जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। इसमें बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और किशोर अपराध जैसे संवेदनशील मामले शामिल थे।

बच्चों के विरुद्ध हो रही हिंसात्मक घटनाओं को रोकने के लिए आयोग ने ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। आयोग ने पुलिस विभाग से पिछले तीन वर्षों में गुम हुए सभी बच्चों की स्थिति पर एक व्यापक रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता जताई है।

82 बच्चे अपने घर वापस नहीं लौटे : अध्यक्ष

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने कहा कि एनसीआरबी की रिपोर्ट में बच्चों से जुड़े अपराध के मामले बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं, लेकिन गायब हुए ज्यादातर बच्चे उसी दिन या घटना के अगले दिन अपने परिवार के पास वापस आ जाते हैं। पिछले तीन साल में 82 मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें बच्चे अपने घरों को वापस नहीं लौटे।

आपराधिक गतिविधियों के कारण पिछले तीन साल में 40 बच्चे गायब हुए हैं। खन्ना ने कहा कि बच्चों को हर स्थिति में एक सुरक्षित और उनके विकास करने हेतु वातावरण उपलब्ध कराना आयोग की जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए काम किया जाएगा। बैठक में बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई, प्रभावी निगरानी और विभागों के बीच सूचना आदान-प्रदान को मजबूत करने पर बल दिया गया।

 



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